इंदौर नए रेलवे स्टेशन की लड़ाई नहीं लड़ पाया

इंदौर। शहर के मास्टर प्लान में रेलवे स्टेशन के लिए जमीन रखकर राज्य सरकार भूल गई। 2008 में लागू हुए मास्टर प्लान में इंदौर-देवास लाइन पर कुमेड़ी और इंदौर-रतलाम लाइन पर लिंबोदागारी में ये जमीन नए स्टेशन के लिए आरक्षित रखी गई थीं, लेकिन इसके बाद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। सरकार की ओर से अब तक इस मामले में किसी ने न तो राजनीतिक स्तर पर कोई पहल की, न आधिकारिक स्तर पर। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस महत्वपूर्ण मामले में कोई रुचि नहीं ली। वर्तमान मास्टर प्लान 2021 तक लागू है और 2017 चल रहा है। जानकार भी मानते हैं कि अभी भी पूरी ताकत के साथ सरकार और जनप्रतिनिधि कोशिश करें तो कुछ न कुछ हो सकता है। अभी प्रदेश और केंद्र, दोनों में भाजपा की सरकारें हैं, इसलिए राजनीतिक रूप से भी इसमें कोई दिक्कत नहीं है। 2010-11 में तत्कालीन कलेक्टर राघवेंद्रसिंह और तत्कालीन आईडीए सीईओ चंद्रमौलि शुक्ला ने जरूर पश्चिम रेलवे के मुंबई मुख्यालय पर संपर्क किया था। मुंबई से अधिकारी आए थे और उन्हें नए स्टेशन के हिसाब से लिंबोदागारी के बजाय कुमेड़ी की जमीन ज्यादा पसंद आई थी।

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